पिछले कुछ सालों में Breast cancer कारण को लेकर महिलाओं में जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन डर और भ्रम अब भी बना हुआ है। हर साल हजारों महिलाएं यह सवाल लेकर आती हैं कि आखिर उन्हें यह बीमारी क्यों हुई, जबकि उनकी लाइफस्टाइल सामान्य थी। इसी उलझन को सुलझाने के लिए Gurugram की Best Cancer Specialist , Dr. Pooja Gupta, इस लेख में बता रही हैं कि स्तन कैंसर असल में क्यों होता है, कौन से जोखिम कारक इसे बढ़ाते हैं, और समय रहते इससे कैसे बचा जा सकता है।
सच यह है कि स्तन कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। यह कई कारकों के मेल से बनता है — कुछ जिन्हें बदला नहीं जा सकता, और कुछ जिन पर आपका पूरा नियंत्रण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
स्तन कैंसर तब शुरू होता है जब स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। सामान्यतः यह वृद्धि दूध बनाने वाली नलिकाओं (डक्ट) या ग्रंथि ऊतक (लोब्यूल) में शुरू होती है।
लगभग 85 से 90 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट पारिवारिक इतिहास नहीं होता। इसका मतलब है कि ज्यादातर मामलों में यह हार्मोनल बदलाव, उम्र और जीवनशैली से जुड़े कारकों की वजह से होता है, न कि सिर्फ जीन की वजह से।
कोशिकाओं के DNA में बदलाव (म्यूटेशन) ही स्तन कैंसर की जड़ में होता है। यह बदलाव दो तरह से आ सकता है:
BRCA जीन में गड़बड़ी वाली महिलाओं में जोखिम काफी ज्यादा होता है, लेकिन ऐसी महिलाएं कुल मरीजों का बहुत छोटा हिस्सा ही होती हैं। बाकी मामलों में हार्मोन, उम्र और रोज़मर्रा की आदतें बड़ी भूमिका निभाती हैं।
जोखिम कारकों को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है — वो जिन्हें बदला नहीं जा सकता, और वो जिन्हें जीवनशैली में सुधार करके नियंत्रित किया जा सकता है।
कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि अगर परिवार में किसी को कैंसर नहीं हुआ, तो उन्हें खतरा नहीं है। यह सोच गलत है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में कोई पारिवारिक इतिहास नहीं होता।
इसी तरह, यह भी गलत धारणा है कि डियोडरेंट या अंडरवायर ब्रा से कैंसर होता है। वैज्ञानिक शोध में इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। सही जानकारी होना जितना जरूरी है, गलत जानकारी से बचना उतना ही जरूरी है।
अच्छी खबर यह है कि जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन काफी हद तक कम जरूर किया जा सकता है। कुछ आसान लेकिन असरदार कदम:
नियमित जांच से कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग सकता है, जब इलाज के परिणाम सबसे बेहतर होते हैं। इसलिए किसी भी गांठ, दर्द या बदलाव को नजरअंदाज न करें।
अगर आपको स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा में झुर्रियां, निप्पल से डिस्चार्ज, या कोई भी असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत किसी अनुभवी कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करें। शुरुआती जांच और सही सलाह से न सिर्फ चिंता कम होती है, बल्कि इलाज भी आसान बन जाता है। Dr. Pooja Gupta जैसी अनुभवी विशेषज्ञ की सलाह लेने से आपको सही दिशा में कदम बढ़ाने में मदद मिलती है।
स्तन कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि यह जेनेटिक, हार्मोनल और जीवनशैली से जुड़े कई कारकों का मेल है। जोखिम कारकों को समझना और समय पर जांच करवाना ही सबसे बड़ा बचाव है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर और नियमित स्क्रीनिंग करवाकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकती हैं।
अगर आपके मन में स्तन कैंसर से जुड़ा कोई भी सवाल या चिंता है, तो अपनी नजदीकी कैंसर विशेषज्ञ से बात करने में देर न करें। सही जानकारी और समय पर कदम, दोनों मिलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।