क्या आपको हाल ही में ब्रेस्ट में गांठ महसूस हुई है? या डॉक्टर ने आपको बायोप्सी करवाने को कहा है? ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है - "मेरी बीमारी किस स्टेज पर है?" Breast कैंसर के चरण को समझना इलाज की दिशा तय करने में सबसे बड़ा कदम होता है। सही समय पर सही जानकारी और Best Cancer Specialist, Dr. Pooja Gupta जैसी अनुभवी डॉक्टर की सलाह मिल जाए, तो घबराहट काफी हद तक कम हो जाती है। इस ब्लॉग में हम स्टेज 0 से लेकर स्टेज 4 तक हर चरण को आसान भाषा में समझेंगे।
स्टेजिंग यानी यह पता लगाना कि कैंसर शरीर में कितना फैला है। डॉक्टर इसके लिए तीन बातें देखते हैं:
इसी आधार पर स्तन कैंसर को पांच चरणों में बांटा जाता है - स्टेज 0, 1, 2, 3 और 4। स्टेज जितनी कम होगी, इलाज उतना ही आसान और परिणाम उतने ही बेहतर होते हैं। इसलिए हर महिला को अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और नियमित जांच करवानी चाहिए।
स्टेज 0 को "नॉन-इनवेसिव" कैंसर कहा जाता है। इसका मतलब है कि असामान्य कोशिकाएं सिर्फ दूध की नलिकाओं (ducts) के अंदर ही मौजूद होती हैं। इन्होंने अभी तक आसपास के ऊतकों पर हमला नहीं किया है। डॉक्टरी भाषा में इसे DCIS (Ductal Carcinoma in Situ) कहते हैं।
इस स्टेज की खास बातें:
यही वजह है कि 40 साल की उम्र के बाद नियमित मैमोग्राम करवाना बेहद जरूरी माना जाता है।
स्टेज 1 में कैंसर कोशिकाएं ducts से बाहर निकलकर आसपास के स्तन ऊतक में फैलने लगती हैं, लेकिन यह फैलाव बहुत सीमित होता है।
इसे दो हिस्सों में बांटा जाता है:
इस स्टेज में सर्जरी (लम्पेक्टॉमी या मास्टेक्टॉमी), रेडिएशन थेरेपी और जरूरत पड़ने पर हार्मोन थेरेपी दी जाती है। जीवित रहने की दर इस स्टेज में भी बहुत अच्छी होती है।
स्टेज 2 में ट्यूमर का आकार बढ़ जाता है या फिर लिम्फ नोड्स में फैलाव थोड़ा ज्यादा हो जाता है। इसे भी दो भागों में बांटा गया है:
इस स्टेज के सामान्य लक्षण:
इलाज में सर्जरी के साथ-साथ कीमोथेरेपी, रेडिएशन और टारगेटेड थेरेपी का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है। सही समय पर उपचार शुरू करने से इस स्टेज में भी परिणाम काफी सकारात्मक रहते हैं।
स्टेज 3 में कैंसर स्तन से आगे बढ़कर आसपास की कई लिम्फ नोड्स या छाती की दीवार, त्वचा तक फैल चुका होता है। लेकिन यह अभी भी शरीर के दूर के अंगों तक नहीं पहुंचा होता। इसे स्थानीय रूप से "एडवांस्ड" कैंसर कहा जाता है।
इस चरण में दिखने वाले संकेत:
इलाज के लिए आमतौर पर पहले कीमोथेरेपी दी जाती है ताकि ट्यूमर का आकार छोटा हो सके, फिर सर्जरी और उसके बाद रेडिएशन थेरेपी की जाती है। इस स्टेज में इलाज थोड़ा जटिल जरूर होता है, लेकिन सही रणनीति और अनुभवी टीम की देखरेख में अच्छे परिणाम पाए जा सकते हैं।
स्टेज 4 सबसे एडवांस्ड चरण है। इसमें कैंसर कोशिकाएं खून या लिम्फ सिस्टम के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे हड्डियों, लिवर, फेफड़ों या दिमाग तक फैल जाती हैं। इसे "मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर" भी कहा जाता है।
इस स्टेज में दिखने वाले सामान्य लक्षण:
स्टेज 4 में पूरी तरह ठीक करना कठिन होता है, लेकिन आधुनिक इलाज जैसे कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। कई मरीज सही देखभाल के साथ लंबे समय तक सामान्य जीवन जी पाते हैं।
डॉक्टर स्टेज तय करने के लिए कुछ आम जांचों का इस्तेमाल करते हैं:
शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई दर्द नहीं होता, इसलिए जागरूकता बहुत जरूरी है। नियमित सेल्फ-एग्जामिनेशन और डॉक्टर से समय-समय पर जांच करवाने से कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है। जितनी जल्दी पहचान होगी, इलाज उतना ही कम आक्रामक और सफल होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।
अगर आपको या आपके किसी अपने को स्तन में गांठ, आकार में बदलाव या कोई असामान्य लक्षण महसूस हो, तो देर न करें। समय पर सही जांच और सही सलाह लेना ही सबसे बड़ा कदम है।
स्तन कैंसर के पांच चरण - स्टेज 0 से स्टेज 4 - मरीज की स्थिति और इलाज की दिशा तय करने में मदद करते हैं। हर स्टेज के अपने लक्षण, अपनी जांच और अपना इलाज होता है। जितनी जल्दी बीमारी पकड़ी जाए, उतना ही बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। नियमित जांच, जागरूकता और सही मार्गदर्शन से इस बीमारी का सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ किया जा सकता है।